ना तो मौलवी ने शराब पिलाई और ना साधू नें शराब पी, बस किसी का मसकद था धर्म को बदनाम करना.

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इस तस्वीर को देख कर ये लगता है कि किसी तीसरे तबके के लोग भारत में हिन्दू धर्म और इस्लाम धर्म को बदनाम करते हुए खुद आगे आना चाहते हैं आज इस तस्वीर की सच्चाई हम बताने जा रहे हैं.

आजकल तकनीक ऐसी आ चुकी है कि किसी भी तस्वीर को कोनसा भी रंग दिया जा सकता है. उसको तकनीक के सहारे कैसे भी बदला जा सकता है. ये सब होता है कम्प्यूटर से फोटोशॉप सॉफ्टवेयर और बहुत से दूसरे सॉफ्टवेयर के सहारे. जो तस्वीर आप देख रहे हैं इस तस्वीर की सच्चाई की आपको जरूर बताई जाएगी, लेकिन पहले इस तस्वीर से होने वाले नुकसान के बारे में आपको अवगत करवाना जरूरी है तो आइए जानते हैं.

इस तस्वीर को देख कर दो धर्म बदनाम हो रहे है जिसमे एक है इस्लाम, दूसरा है हिन्दू धर्म, इस्लाम में शराब को हराम माना गया है,और हिन्दू धर्म में कोई भी भगवा वस्त्र पहने हुए साधू कोई ऐसे शराब नही पीता क्योंकि यह उसकी मर्यादा के खिलाफ जो है. दूसरी बात ऐसी तसवीरें किसी भी समुदाय की धार्मिक आस्थाओं को बुरी तरह से प्रभावित करती हैं. ऊंचे पदों पर बैठे लोग वो चाहे मौलवी हो या साधू, आम लोगों का विशवास उनसे उठने लगता है.

आपको बता दें कि यह तस्वीर एक दम नकली है और इसे फोटोशॉप की मदद से बनाया गया है इस तस्वीर में एक मौलवी एक साधू को गिलास में शराब डाल रहा है जो कि एक दम गलत है. एडिटिंग करने वाला इंसान गिलास में डाले जा रहे लिक्विड का रंग बदलना भूल गया और एक तरफ शराब की बोतल मौलवी के हाथों में लगा दी.

इस तस्वीर को ट्विटर और फ़ेसबुक पर बहुत शेयर ईया गया लेकिन असल में मौलवी के हाथ में शराब नही पानी को बोतल है और वो साधू को पानी पिला रहा है जिसको फोटोशॉप करके गलत ढंग से पेश किया गया था.

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